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Showing posts from March, 2026

उत्तराखण्ड लोकपर्व फूलदेई की हार्दिक शुभकामनाएं

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उत्तराखण्ड का प्रसिद्ध लोकपर्व फूलदेई प्रकृति, खुशहाली और लोकसंस्कृति का प्रतीक है। हर वर्ष चैत्र संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह पर्व नई ऋतु के आगमन और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना का संदेश देता है। इस दिन छोटे-छोटे बच्चे घर-घर जाकर दहलीज पर फूल, चावल और गुड़ अर्पित करते हैं और घर के सदस्यों के लिए मंगलकामनाएं करते हैं। फूलदेई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी लोक परंपराओं, प्रकृति के प्रति प्रेम और आपसी सद्भाव का सुंदर प्रतीक है। इस अवसर पर प्रकृति भी अपनी अनोखी छटा बिखेरती है। पेड़-पौधों पर नए पत्ते और रंग-बिरंगे फूल खिल उठते हैं, जो वातावरण को आनंद और उत्साह से भर देते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ जुड़कर और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनकर ही जीवन को सुंदर बनाया जा सकता है। उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृति और लोकजीवन की झलक इस पर्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। फूलदेई के इस पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशियां लेकर आए। **फूलदेई छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार** ...

शिक्षा विभाग, नई दिल्ली ने CM SHRI Schools Admission 2026 के तहत कक्षाओं VI, IX और XI में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब छात्र-छात्राएं 🟥 25 मार्च 2026 (शाम 5:00 बजे तक) आवेदन कर सकते हैं।

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नई दिल्ली। शिक्षा विभाग ने CM SHRI Schools Admission 2026 के तहत कक्षाओं VI, IX और XI में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब छात्र-छात्राएं 🟥 25 मार्च 2026 (शाम 5:00 बजे तक) आवेदन कर सकते हैं । पहले आवेदन की अंतिम तिथि इससे पहले निर्धारित की गई थी, लेकिन विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह प्रवेश प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए आयोजित की जा रही है। इच्छुक छात्र-छात्राओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया के तहत चयन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके लिए विस्तृत सर्कुलर और पाठ्यक्रम भी जारी कर दिया गया है, ताकि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी कर सकें। विभाग की ओर से परीक्षा से संबंधित दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिनमें आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और परीक्षा के नियमों की जानकारी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन स्कूलो...

इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन, दिल्ली के दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं

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नई दिल्ली, दिनांक 12 मार्च, इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन (Indira Gandhi Delhi Technical University for Women) के दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में 1181 छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्री देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की महिलाएं केवल विकास की सहभागी नहीं हैं, बल्कि देश के नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता। इतिहास गवाह है कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दिया है। तकनीकी शिक्षा के माध्यम से महिलाएं और अधिक सशक्त हो रही हैं और भविष्य में देश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा, कौशल विकास, तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। जब महिलाएं शिक्षा और...

बदलती शादियाँ: रिश्तों से ज्यादा “प्रति प्लेट” का हिसाब

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बदलती शादियाँ: रिश्तों से ज्यादा “प्रति प्लेट” का हिसाब भारतीय समाज में शादी-विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं होता था, बल्कि यह पूरे समाज और रिश्तों का उत्सव हुआ करता था। पहले गांवों और कस्बों में शादियाँ बड़े सादे लेकिन दिल से भरे माहौल में होती थीं। घर के आंगन में टेंट लगता था, रिश्तेदार कई दिन पहले आकर तैयारियों में हाथ बंटाते थे और आस-पड़ोस के लोग भी खुशी में शामिल होते थे। शादी का निमंत्रण भी बहुत सरल होता था—“शादी है, जरूर आना और भोजन करके जाना।” उस समय किसी के आने-जाने या खाने पर कोई हिसाब नहीं लगाया जाता था। लेकिन समय के साथ शादी-विवाह की परंपराओं में बड़ा बदलाव आया है। अब अधिकतर शादियाँ फार्म हाउस, बैंक्वेट हॉल या बड़े होटल में होने लगी हैं। इन जगहों पर भोजन और व्यवस्थाएँ “प्रति प्लेट” के हिसाब से तय होती हैं—कहीं 1000 रुपये, कहीं 1500, कहीं 2000 और कहीं 2500 रुपये प्रति व्यक्ति। यही कारण है कि अब निमंत्रण भी उसी हिसाब से दिया जाने लगा है। पहले जहां पूरे परिवार, दूर के रिश्तेदार और गांव के लोग भी आमंत्रित होते थे, अब सूची सीमित हो गई है। आजकल कई लोग निमंत्रण देते समय यह भी सोच...

युद्ध के नहीं, बुद्ध की शरण में जाओ

मानव सभ्यता के इतिहास में युद्ध और हिंसा ने जितना विनाश किया है, उतना शायद किसी और चीज़ ने नहीं किया। युद्ध केवल दो देशों या सेनाओं के बीच की लड़ाई नहीं होता, बल्कि यह मानवता, संस्कृति और विकास पर भी गहरा आघात करता है। युद्ध में लाखों लोग मारे जाते हैं, करोड़ों लोग बेघर हो जाते हैं और देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है। इसलिए आज के समय में यह कहना अत्यंत प्रासंगिक हो गया है कि “युद्ध के नहीं, बुद्ध की शरण में जाओ।” भगवान बुद्ध ने लगभग ढाई हजार वर्ष पहले ही मानवता को अहिंसा, करुणा और शांति का मार्ग दिखाया था। उन्होंने सिखाया कि क्रोध, घृणा और हिंसा से कभी भी स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। बुद्ध का संदेश था कि मनुष्य को अपने भीतर शांति और करुणा का विकास करना चाहिए। यदि मनुष्य अपने मन को जीत ले, तो वह संसार में भी शांति स्थापित कर सकता है। बुद्ध का यह संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनके समय में था। आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। कभी सीमा विवाद के कारण, कभी धर्म और जाति के नाम पर, तो कभी राजनीतिक स्वार्थों के कारण युद्ध छिड़ जाते हैं।...

बुराड़ी दिल्ली के कोचिंग सेंटर में 12वीं की लड़कियों से रेप करता था ट्यूशन टीचर

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बुराड़ी डिल्ली से गुरु-शिष्य के रिश्ते को शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक निजी संस्थान का ट्यूशन टीचर पिछले दो साल से तीन छात्राओं का यौन शोषण कर रहा था। आरोपी टीचर 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली इन छात्राओं को फोटो-वीडियो वायरल करने और उनके परिवार की हत्या करने की धमकी देकर चुप कराता था। पीड़ित छात्राओं ने सोमवार को थाने में अपनी आपबीती बताई। छात्राओं का आरोप है कि आरोपी धीरज चौधरी ट्यूशन पढ़ाने के बहाने उनके साथ अश्लील हरकतें करता था। विरोध करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, पोक्सो एक्ट, मारपीट और बंधक बनाने जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। 17 वर्षीय पीड़िता रंजना (परिवर्तित नाम) के अनुसार अक्तूबर 2024 में ट्यूशन टीचर धीरज चौधरी ने जन्मदिन के बहाने पार्टी रखी थी। आरोप है कि पार्टी के दौरान वह शराब के नशे में तीनों छात्राओं से मारपीट करने लगा। दरअसल, उसे पता चला था कि छात्राएं अपने दोस्तों के साथ घूमने गई थीं। पीड़िता के मुताबिक पिछले साल अगस्त में धीरज ने उसे और उसकी एक सहेली को को...

युद्ध समस्या का समाधान नहीं

मानव इतिहास यह बताता है कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं रहा। जब भी देशों के बीच विवाद बढ़े और संवाद की जगह हथियारों ने ले ली, तब उसका परिणाम केवल विनाश, पीड़ा और अस्थिरता के रूप में सामने आया। युद्ध के बाद भी अंततः देशों को आपस में बैठकर समझौता और संधि ही करनी पड़ती है। इसलिए यह प्रश्न हमेशा उठता है कि जब अंत में बातचीत ही करनी है, तो युद्ध की भयावहता से गुजरने की आवश्यकता क्यों पड़ती है। युद्ध का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह होता है कि इसमें जन और धन दोनों की भारी हानि होती है। हजारों-लाखों सैनिक और निर्दोष नागरिक अपनी जान गंवा देते हैं। शहर, गांव, उद्योग, सड़कें और पुल जैसे बुनियादी ढांचे नष्ट हो जाते हैं। युद्ध के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ता है। युद्ध लड़ने वाले देशों को तो नुकसान होता ही है, लेकिन इसका प्रभाव दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ता है, क्योंकि आज की दुनिया आर्थिक और सामाजिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। बीसवीं शताब्दी के दो बड़े युद्ध—World War I और World War II—मानव इतिहास के सबसे विनाशकारी युद्धों में गिने जाते हैं। प्रथम विश्व युद्ध के...

दिल्ली पुस्तकालय संघ का 88 वां स्थापना दिवस एवं वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

दिल्ली विश्वविद्यालय गांधी भवन में दिल्ली पुस्तकालय संघ का 88 वां स्थापना दिवस एवं वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। डीएलए के अध्यक्ष, गांधी भवन के निदेशक एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. के. पी. सिंह ने सभी आगंतुक अतिथियों का परिचय कराया। अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पूर्व पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो. प्रेम सिंह जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रो. एस. आर. रंगनाथन जैसे व्यक्तित्वों की कर्मठता के कारण आज हम पुस्तकालय विज्ञान विभाग को जान पाए हैं। गणित के प्रोफेसर होने के बाद भी प्रो. रंगनाथन जी की पुस्तकालय विज्ञान विषय को लेकर जो निष्ठा थी, उसको शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय पुस्तकालयों के बिना अधूरे हैं। विश्वविद्यालय पुस्तकालयों से ही आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के आरंभ के समय से 1960 के दशक तक की पुस्तकालय विज्ञान विभाग एवं पुस्तकालय की यात्रा का संस्मरण या...

लखनऊ के बीबीडी परिसर में आयोजित वार्षिकोत्सव 'उत्कर्ष-2026' का आयोजन दिनाँक 26-28 फरवरी तक किया गया

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लखनऊ के बीबीडी परिसर में आयोजित वार्षिकोत्सव 'उत्कर्ष-2026' का आयोजन दिनाँक 26-28 फरवरी तक किया गया। डॉ. अखिलेश दास गुप्ता ऑडिटोरियम में हुए इस आयोजन में छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रंग, रोशनी और संगीत के बीच सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अलका दास गुप्ता, बीबीडी ग्रुप के प्रेसीडेंट एवं प्रो-चांसलर विराज सागर दास, डायरेक्टर एडीजी स्कूल देवांशी दास और वाइस प्रेसीडेंट सोनाक्षी दास ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। छात्राओं ने गणेश वंदना नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बनाया। ' विरासत से विकास तक' थीम पर कल्चरल फेस्ट ने भारत की सांस्कृतिक परंपरा से लेकर आधुनिक उपलब्धियों तक की यात्रा को मंच पर जीवंत किया। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। शैक्षणिक संस्थान प्रतिभा और नवाचार का मंच मुख्य अतिथि अलका दास गुप्ता ने कहा कि 'उत्कर्ष-2026' ने यह साबित किया है कि बीबीडी केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि प्रतिभा और नवाचार का जीवंत मंच है। उन्होंने जोर दिया कि पुरस्कार जीतना महत्वपूर्...

केस स्टडी: लाइब्रेरी से पुस्तक चोरी करने का प्रयास और उसका खुलासा-II

शैक्षणिक संस्थानों की लाइब्रेरी ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत होती है। यहां उपलब्ध पुस्तकें सभी छात्रों के अध्ययन के लिए होती हैं, इसलिए इनके उपयोग के लिए कुछ नियम बनाए जाते हैं। प्रस्तुत केस स्टडी एक ऐसे छात्र से संबंधित है जिसने लाइब्रेरी से पुस्तक को बिना इश्यू कराए बाहर ले जाने का बार-बार प्रयास किया और अंततः पकड़ा गया। घटना का प्रारंभ एक छात्र ने लाइब्रेरी से “Law of Torts” विषय की एक पुस्तक 15 दिनों के लिए इश्यू कराई थी। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद उसने पुस्तक 4–5 दिन की देरी से वापस की, जिसके कारण उसे जुर्माना भी देना पड़ा। इसके बाद वह छात्र कई बार लाइब्रेरी में आता और उसी विषय की पुस्तक इश्यू काउंटर तक लाता, लेकिन उसे इश्यू नहीं कराता था। कुछ दिनों बाद उसने लाइब्रेरी की एक रेफरेंस बुक को रजिस्टर के अंदर छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश की, लेकिन लाइब्रेरियन ने उसे रोक लिया। पूछने पर उसने कहा कि उसे यह पुस्तक किसी मैडम को दिखानी थी। लाइब्रेरियन ने स्पष्ट किया कि बिना इश्यू किए कोई भी पुस्तक बाहर नहीं ले जाई जा सकती। इसके बावजूद छात्र ने अगले दिन फिर से वही प्रयास किया और बहाना बनाय...

केस स्टडी: लाइब्रेरी से पुस्तक को बिना इश्यू बाहर ले जाने का प्रयास-I

किसी भी शैक्षणिक संस्थान की लाइब्रेरी ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र होती है। यहां उपलब्ध पुस्तकें और अन्य अध्ययन सामग्री सभी छात्रों की सामूहिक संपत्ति मानी जाती हैं। इसलिए लाइब्रेरी में पुस्तकों के निर्गमन और वापसी के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाते हैं। प्रस्तुत केस स्टडी एक ऐसे छात्र से संबंधित है जिसने लाइब्रेरी से पुस्तक को बिना इश्यू कराए बाहर ले जाने का बार-बार प्रयास किया। घटना का विवरण एक छात्र ने लाइब्रेरी से “Law of Torts” विषय की एक पुस्तक 15 दिनों के लिए इश्यू कराई थी। निर्धारित समय पूरा होने के बाद छात्र ने पुस्तक 4–5 दिन की देरी से लौटाई और उसे नियमानुसार जुर्माना भी देना पड़ा। इसके बाद कुछ दिनों तक छात्र लाइब्रेरी में आता रहा और वही पुस्तक इश्यू काउंटर तक लाता, लेकिन उसे इश्यू नहीं कराता था। कुछ समय बाद छात्र एक दूसरी पुस्तक लेकर आया, जो केवल रेफरेंस के लिए रखी गई थी और जिसे लाइब्रेरी से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं थी। अगले दिन छात्र ने उस पुस्तक को रजिस्टर के अंदर रखकर लाइब्रेरी से बाहर ले जाने की कोशिश की। लाइब्रेरियन ने उसे देखते ही रोक लिया और पूछा कि बिना इश्यू किए वह पुस्त...

DU में 102 वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें एक लाख से अधिक छात्रों को उपराष्ट्रपति ने डिग्रियां प्रदान की

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दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाल ही दिनांक 28 फरवरी 2026 शनिवार को अपना 102वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जहां भारत के उपराष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के कुलपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 1,20,408 छात्रों को डिजिटल डिग्री प्रदान की और व्यक्तिगत रूप से 10 मेधावी स्नातकों को पदक प्रदान किए। इस समारोह में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को दर्ज करने वाली  "बुक ऑफ हाइलाइट्स"  का विमोचन भी किया गया। स्नातकों को दीक्षांत करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, “दीक्षांत समारोह अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। डिग्रियां मात्र प्रमाण पत्र हैं; सच्ची शिक्षा मानवता, चरित्र और जिम्मेदारी में झलकती है। शिक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया है।” उन्होंने छात्रों से ज्ञान, संवेदनशीलता और सेवा भाव के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि आज के युवा 2047 के विकसित भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 1922 में महज़ तीन हज़ार विद्यार्थियों के साथ स्थापित होने के बाद से विश्वविद्यालय के विकास पर प्रकाश डालते हुए, राधाकृष्णन ने कहा, “दिल्ली विश...

भारत ने T- 20 वर्ल्ड कप 2026 जीतकर इतिहास रच डाला है। भारत ने रविवार को खिताबी मुकाबले में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम किया। भारत ने 255/5 का स्कोर बनाने के बाद न्यूजीलैंड को 159 रनों पर ही रोक दिया

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भारत ने T- 20 वर्ल्ड कप 2026 जीतकर इतिहास रच डाला है। भारत ने रविवार को खिताबी मुकाबले में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम किया। भारत ने 255/5 का स्कोर बनाने के बाद न्यूजीलैंड को 159 रनों पर ही रोक दिया। भारत टी20 वर्ल्ड कप की तीन ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन गई है। फाइनल में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने चार ओवर में 15 रन देकर चार विकेट चटकाए और प्लेयर ऑफ द चुने मैच गए। वह दोहरी खुशी से चूक गए। 2024 में वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे बुमराह इस बार यह अवॉर्ड नहीं जीत पाए। उन्होंने टूर्नामेंट में 8 मैचों में संयुक्त रूप से सर्वाधिक 14 विकेट चटकाए।  संजू सैमसन को मैन ऑफ़ दि सीरीज के पुरस्कार से सम्मानित किया गया उन्होंने कुल 321 रन बनाए सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप में पांच मैचों में 46.57 के औसत और 199.37 के स्ट्राइक रेट से 321 रन बनाए। उन्होंने लगातार तीन मैचों में पचास प्लस स्कोर बनाया। सैमसन ने फाइनल में 46 गेंदों में पांच चौकों और आठ चौकों की मदद से 89 रनों की पारी खेली। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 और वेस्टइंडीज के विरुद्ध सुपर-8 मैच में...

मजलिस पार्क से मौजपुर-बाबरपुर पिंक लाइन और दीपाली चौक से मजलिस पार्क (मैजेंटा लाइन) मेट्रो कॉरिडोर का उद्घाटन आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 8 मार्च को महिला दिवस के मौके पर किया और साथ ही दिल्ली मेट्रो के फेज-5 के तहत नए मेट्रो प्रोजेक्ट की बुनियाद भी रखी

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मजलिस पार्क, बुराड़ी से मौजपुर तक मेट्रो चल पड़ी, खुल गई रिंग मेट्रो, ये हैं दिल्ली मेट्रो के 17 नए स्टेशन। मजलिस पार्क से मौजपुर-बाबरपुर पिंक लाइन और दीपाली चौक से मजलिस पार्क (मैजेंटा लाइन) को मेट्रो कॉरिडोर का उद्घाटन पीएम मोदी ने 8 मार्च को महिला दिवस के मौके पर किया. ये देश की सबसे बड़ी रिंग मेट्रो है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर और फेज-5 के तहत नए प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी तथा मजलिस पार्क से मौजपुर-बाबरपुर पिंक लाइन मेट्रो कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया जो रिंग मेट्रो का हिस्सा है। पिंक लाइन मेट्रो 71 किलोमीटर लंबी है जिसमें 38 स्टेशन शामिल हैं और यह दिल्ली की सभी मेट्रो लाइनों को जोड़ती है। पीएम मोदी ने रविवार को दिल्ली मेट्रो के दो कॉरिडोर का उद्घाटन किया। साथ ही दिल्ली मेट्रो के फेज-5 के तहत नए मेट्रो प्रोजेक्ट की बुनियाद भी रखी। पीएम मोदी दिल्ली सरकार की आवास योजना के तहत बने सैकड़ों घरों की चाबियां भी महिलाओं को सौंपी. प्रधानमंत्री ने मजलिस पार्क से मौजपुर-बाबरपुर पिंक लाइन मेट्रो कॉरिडोर का उद्घाटन किया. साथ ही दीपाली चौक से मजलिस पार्क (मै...

दिल्ली के नरेला में स्थित सीपीजे कॉलेज में 13 मार्च को ‘मेगा जॉब फेयर-2026' आयोजित होगा, 50 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

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राजधानी दिल्ली के नरेला स्थित सीपीजे ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन द्वारा 13 मार्च 2026 को एक बड़े रोजगार मेले “मेगा जॉब फेयर-2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम चन्द्रप्रभु जैन कॉलेज ऑफ हाइयर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ के परिसर में आयोजित होगा, जहां विभिन्न क्षेत्रों की 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेकर युवाओं को रोजगार और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेंगी। संस्थान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह जॉब फेयर शुक्रवार 13 मार्च को सुबह 9 बजे से शुरू होगा। इसमें दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के विभिन्न कॉलेजों के छात्र भी भाग ले सकेंगे। आयोजकों का कहना है कि इस रोजगार मेले का उद्देश्य युवाओं को उद्योग जगत से जोड़ना और उन्हें सीधे कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलने का अवसर देना है। एक ही मंच पर रोजगार के अवसर मेगा जॉब फेयर में 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेंगी। कार्यक्रम के दौरान उम्मीदवारों के ऑन-द-स्पॉट इंटरव्यू और चयन की प्रक्रिया भी होगी, जिससे योग्य छात्रों को तुरंत रोजगार का अव...

गुलाल से गिलास तक: होली का बदलता स्वरूप

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कभी होली का नाम लेते ही मन में रंग, गुलाल, ढोलक और फाग की धुन गूंजने लगती थी। गली-मोहल्लों में बच्चे पिचकारी लेकर दौड़ते थे, बुजुर्ग चौपाल में बैठकर “अरे खेले रघुवीरा अवध में होली…” गाते थे और घर-घर से गुजिया और दही-बड़े की खुशबू आती थी। होली का असली रंग लोगों के चेहरों पर नहीं, दिलों में होता था। लेकिन समय की हवा कुछ ऐसी बदली है कि अब कई जगह होली का रंग गुलाल से कम और गिलास से ज्यादा दिखने लगा है। आजकल होली का मतलब कुछ लोगों के लिए रंग-गुलाल से ज्यादा “दारू का दौर” हो गया है। सुबह से ही कुछ उत्साही मित्रों की टोली निकल पड़ती है। हाथ में अबीर-गुलाल की छोटी-सी पुड़िया और जेब में बड़ी-सी उम्मीद — कि आज हर घर में “स्वागत पेय” मिलेगा। पहले घर में घुसते ही आवाज आती है — “अरे आइए, होली है!” फिर थोड़ी देर में दूसरा वाक्य — “कुछ ठंडा-गरम हो जाए?” अब “ठंडा-गरम” शब्द का अर्थ सब समझते हैं। टेबल पर बोतल सज जाती है। कोई गर्व से कहता है — “भाई, इस बार बकार्डी लाई है।” दूसरा मित्र बोतल को देखकर विशेषज्ञ की तरह सिर हिलाता है, मानो किसी बड़ी प्रदर्शनी का निरीक्षण कर रहा हो। गिलास बनता है। कोई कहता है —...

जलेबी, गुजिया और शुगर का पेशेंट

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भारत में त्योहारों की पहचान अगर किसी चीज़ से है तो वह है मिठाइयाँ। और मिठाइयों की दुनिया में दो नाम ऐसे हैं जो आते ही मन को डगमगा देते हैं — जलेबी और गुजिया। एक गरमा-गरम चाशनी में डूबी गोल-गोल जलेबी, दूसरी खोए और मेवे से भरी मुस्कुराती गुजिया। अब ज़रा कल्पना कीजिए — सामने थाली में जलेबी और गुजिया सजी हों, और बगल में बैठा हो एक शुगर का पेशेंट। उसकी आँखों में चमक है, पर चेहरे पर संयम का मुखौटा। डॉक्टर ने साफ़ कहा है — “मीठा कम से कम।” लेकिन त्योहार कहता है — “आज तो खा लो!” यही संघर्ष इस लेख का विषय है। डॉक्टर बनाम दिल शुगर के मरीज की ज़िंदगी में सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि जिस चीज़ से उसे सबसे ज्यादा प्यार है, वही उसके लिए सबसे खतरनाक है। जलेबी को देखते ही उसके मन में बचपन की यादें दौड़ पड़ती हैं — मेले की दुकान, गर्म कढ़ाई, और कागज़ की प्लेट। गुजिया को देखते ही होली की सुबह याद आती है, जब घर में खुशबू फैल जाती थी। पर तभी भीतर से एक आवाज़ आती है — “शुगर लेवल याद है?” दिल कहता है — “बस एक।” दिमाग कहता है — “एक कभी एक नहीं होती।” ‘बस आधी’ का दर्शन शुगर के मरीज का सबसे बड़ा दर्शन है — “बस...

इजा की विरासत : गहनों से बड़ी एक सीख

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पहाड़ों में “माँ” को सिर्फ माँ नहीं कहा जाता, उसे “इजा” कहा जाता है। इस एक शब्द में ममता, त्याग, अनुशासन और अनगिनत यादें समाई रहती हैं। इजा का घर छोटा हो सकता है, पर उसका मन और उसकी गठरी बहुत बड़ी होती है — जिसमें वह बच्चों के लिए सपने भी रखती है और थोड़े-से गहने भी। इजा के पास कोई बहुत बड़ा खजाना नहीं है। बस एक ग्लोबंद, एक नथ, गले का एक मंगलसूत्र, एक जोड़ी कान के झुमके, एक जोड़ी छोटे टॉप्स, एक शीशफूल, और एक जोड़ी चांदी के पोंजी। यही उसकी पूरी पूँजी है, जिसे उसने सालों सँभालकर रखा है। ये गहने उसके लिए सिर्फ धातु नहीं, जीवन की कहानी हैं। ग्लोबंद उसे शादी में मिला था, जब वह नई दुल्हन बनकर इस घर में आई थी। नथ पहाड़ की पहचान है — बड़े जतन से पहनती थी वह, खास त्योहारों और शादियों में। मंगलसूत्र उसके वैवाहिक जीवन की निशानी है, जिसे उसने हर सुख-दुख में अपने गले से लगाए रखा। झुमके और टॉप्स बच्चों के जन्म के बाद बनवाए गए थे, जब घर की हालत थोड़ी सुधरी थी। शीशफूल उसकी युवावस्था की याद है, और चांदी के पोंजी उसके पैरों की वह छनक, जो अब उम्र के साथ धीमी हो चुकी है। अब इजा बूढ़ी हो चली है। बाल सफेद ह...

होली – रंगों और उल्लास का पर्व .. हैप्पी होली

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होली भारत का एक प्रमुख और प्राचीन त्योहार है, जिसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है। यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव का प्रतीक भी है। इस दिन लोग अपने पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं और रंग-गुलाल लगाकर खुशियां बांटते हैं। होली का संबंध पौराणिक कथा से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि भक्त प्रह्लाद की भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठ जाए। परंतु ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की स्मृति में होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। होली के दिन बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी रंगों में सराबोर नजर आते हैं। ढोल-नगाड़ों की धुन पर लोग नाचते-गाते हैं और घर-घर जाकर मिठाइयाँ बांटते हैं। गुझिया, मालपुआ और ठंडाई जैसे विशेष व्यंजन इस त्योहार की शोभा बढ़ाते हैं। आज के समय में हमें प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का प्रयोग करना...

मायके का मोह या गहनों का गणित?

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भारतीय समाज में “मायका” शब्द सुनते ही आँखों में स्नेह, बचपन की यादें, माँ की रसोई और पिता की डाँट का मिश्रित भाव उभर आता है। मायका वह स्थान माना जाता है जहाँ बेटी का हक़ बिना शर्त होता है, जहाँ वह उम्र भर बच्ची ही रहती है। पर समय बदलता है, भावनाएँ भी कभी-कभी हिसाब-किताब में बदल जाती हैं। और तब मायका भावनाओं का घर कम, “संभावित संपत्ति” का पता ज़्यादा लगने लगता है। यह व्यंग्य उसी बदलती मानसिकता पर है — जहाँ कुछ लोग (सिर्फ महिलाएँ ही नहीं, पुरुष भी कम नहीं) बुढ़ापे में माँ-बाप के स्वास्थ्य से कम और उनकी अलमारी से ज़्यादा जुड़ाव रखते हैं। मायके का हालचाल और लॉकर की लोकेशन कुछ बेटियाँ साल में दो बार मायके जाती हैं — एक राखी पर, दूसरी दिवाली पर। पर कुछ ऐसी भी होती हैं जिनकी यात्रा का समय बड़ा “रणनीतिक” होता है। जैसे ही खबर मिलती है कि माँ की तबीयत ढीली है, बेटी तुरंत पहुँच जाती है। दरवाज़े पर घुसते ही पहला वाक्य — “अरे माँ, तुम तो बिल्कुल कमजोर हो गई हो!” और मन में दूसरा वाक्य — “लॉकर की चाबी कहाँ रखती हो?” बातों-बातों में पूछ लेंगी — “माँ, वो पुराना हार कहाँ है? जो नानी ने दिया था?” माँ भाव...