आप सभी को उत्तराखंड के पावन लोक पर्व हरेला की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलकामनाएँ
हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, हरियाली, समृद्धि, नई आशाओं और जीवन के उत्सव का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखने की प्रेरणा देता है। सावन मास के आगमन के साथ मनाया जाने वाला यह लोकपर्व नई फसल, हरियाली और खुशहाली का संदेश लेकर आता है।
हरेला हमें यह याद दिलाता है कि हमारा जीवन प्रकृति पर निर्भर है। पेड़-पौधे, नदियाँ, पर्वत और वन हमारी अमूल्य धरोहर हैं। यदि हम इनकी रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण, शुद्ध जल और स्वस्थ जीवन मिल सकेगा। इसलिए इस शुभ अवसर पर आइए, हम सभी कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसकी देखभाल का संकल्प लें। यही हरेला पर्व मनाने का सबसे सुंदर और सार्थक तरीका है।
यह पर्व परिवारों को एकजुट करने का भी संदेश देता है। हरेले के अवसर पर घर के बड़े-बुजुर्ग अपने स्नेह और आशीर्वाद से परिवार के छोटे सदस्यों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा हमें अपने संस्कारों, परिवार और संस्कृति से जोड़ती है। हमें इन परंपराओं को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुँचाना चाहिए ताकि हमारी लोक संस्कृति सदैव जीवित रहे।
आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब हरेला का संदेश पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। यह पर्व हमें केवल उत्सव मनाने के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने और उन्हें निभाने की प्रेरणा देता है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी मिलकर हरियाली बढ़ाने, जल स्रोतों की रक्षा करने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें। साथ ही, अपने समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करें।
ईश्वर से प्रार्थना है कि हरेला का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए। आपके परिवार में सदैव खुशियाँ बनी रहें, आपके जीवन में सफलता के नए द्वार खुलें और आपका घर-आँगन हरेला की हरियाली की तरह सदा आनंद और समृद्धि से भरपूर रहे।
एक बार पुनः आप सभी को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
"हरेला मनाएँ, पेड़ लगाएँ, प्रकृति बचाएँ और हरियाली बढ़ाएँ।"