APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सहमति फॉर्म में 'ऑप्ट-आउट' विकल्प जोड़ने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संकेत दिया कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी के लिए उपयोग किए जाने वाले सहमति (कंसेंट) फॉर्म में ऐसा प्रावधान शामिल करने का निर्देश देगा, जिससे अभिभावकों को योजना में शामिल न होने (ऑप्ट-आउट) का स्पष्ट विकल्प मिल सके।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ APAAR योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दावा किया गया है कि व्यवहारिक रूप से यह योजना छात्रों को आधार से जोड़ने के लिए प्रेरित करती है और इससे बच्चों की निजता तथा व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत में कहा कि सरकार इस योजना को स्वैच्छिक बताती है, लेकिन कई शिक्षण संस्थानों में APAAR आईडी को परीक्षा जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक बताया जा रहा है। उनका तर्क था कि शिक्षा एक संवैधानिक अधिकार है और इसे आधार या APAAR आईडी से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सहमति फॉर्म में शुरुआत से ही योजना को अस्वीकार करने का स्पष्ट विकल्प उपलब्ध नहीं है।
जयसिंह ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिभावकों को पूरी जानकारी के आधार पर सहमति देने, उसे वापस लेने और बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार मिलना चाहिए।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रत्येक छात्र के लिए एक विशिष्ट अकादमिक पहचान संख्या शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने, शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और प्रशासनिक निगरानी में सहायक हो सकती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि हर सरकारी पहल को संदेह की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें केंद्र सरकार को APAAR के मॉडल सहमति फॉर्म में 'सहमति से इनकार' और 'ऑप्ट-आउट' का स्पष्ट विकल्प जोड़ने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया कि इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू किया जाए।
पीठ ने पूछा कि क्या ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ कोई अपील दायर की गई है। जब बताया गया कि ऐसा नहीं हुआ है, तो अदालत ने कहा कि वह CBSE को उस व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्देश देगी। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
क्या है APAAR योजना?
केंद्र सरकार ने 29 जुलाई 2023 को 'वन स्टूडेंट, वन यूनिक आईडी' पहल के तहत APAAR योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक छात्र को एक स्थायी डिजिटल अकादमिक पहचान उपलब्ध कराना है, जिससे उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड और उपलब्धियों का डिजिटल रूप से दीर्घकालिक संरक्षण किया जा सके।
हालांकि, याचिका में कहा गया है कि आधार से जुड़ी इस व्यवस्था और उससे संबंधित डेटा प्रोसेसिंग छात्रों के निजता के अधिकार, शिक्षा के अधिकार तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21A के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि जो छात्र APAAR योजना में शामिल नहीं होना चाहते, उनके साथ प्रवेश, परीक्षा, अंकपत्र या प्रमाणपत्र जारी करने जैसी किसी भी प्रक्रिया में भेदभाव न किया जाए।